मामी को बच्चा चाहीये था

इस बार जब मैं मामी के यहाँ गया तो फिर वो मुझको देखकर काफी खुश हो गईं। वे मेरी तरफ मुस्‍कुराकर देखने लगीं तो मैंने मामी को आंख मार दी। तो बदले में मामी ने भी प्रतिक्रिया दी और मेरी तरफ मुस्‍कुराकर आंख मारी। तो मैं उनकी तरफ देखकर मुस्‍कुराने लगा।
तभी नानी ने कहा- चाय बना लाओ!
और मामी चाय बनाने चली गईं।

मेरी मामी के यहाँ मामी, मामा, नाना, नानी और मेरी आंटी की छोटी बहन रहती थी। आंटी की छोटी बहन की उम्र यही कोई 18-19 साल की होगी। और मामी की उम्र कोई 20 साल की थी जबकि मामा की उम्र कोई 40 साल। आप आश्‍चर्य कर रहे होंगे की ऐसा कैसे हो सकता है। लेकिन ऐसा था क्‍योंकि मामा का पहली वाइफ से तलाक हो चुका था, कारण मामा काफी शराब पीते थे।

जो मेरी मामी थी वो गरीब परिवार से थी जबकि मामा अमीर परिवार से इसलिए उनकी शादी जोड़तोड़ करके कर दी गई। जबकि मेरी मौसी मेरे नाना की दूसरी पत्‍नी से पैदा हुई, क्‍योंकि पहली वाली बीवी खत्‍म हो गई थी। यह तो हुआ परिचय। अब आप लोगों को ज्‍यादा बोर न करते हुए कहानी पर आता हूं।

तो मामी चाय बनाने चली गईं और मैं वहीं ड्राइंगरूम में बैठकर नानी और मौसी से बात करने लगा। मेरी मौसी भी कोई कम मस्‍त नहीं है वो तो इतनी मस्‍त है कि क्‍या कहने! उसकी गाण्ड कोई देख ले तो हाय हाय लंड पूरा खड़ा हो जाए और चूचियाँ बेशक अभी छोटी ही हैं लेकिन इतनी कड़ी कि हाय टॉप पूरा तन जाता! मानो किसी को आमंत्रित कर रहीं हों! लेकिन अभी तक मैंने उसको फंसाने के लिए कोई भी तरीका इस्‍तेमाल नहीं किया था।

खैर, मामी चाय बनाकर ले आईं और सबको देने लगीं। मुझको चाय देते हुए अपनी ऊँगलियों को मेरी ऊँगलियों से छुआ और मुस्‍कुराईं। और यह मौसी ने देख लिया लेकिन उसने कहा कुछ भी नहीं और अंजान बनी बैठी रही।

चाय पीने के बाद मैंने मौसी से कहा- चलो, घूमने चलते हैं!

और हम दोनों घूमने चले गये। वहाँ पर मौसी मुझे मामी के बारे में बताती रहीं और मैं भी बीच बीच में पूछता रहा। कोई एक घंटा घूमकर हम वापस आये। अभी शाम होने में देर थी तो वो अपनी सहेली से मिलने चली गई।

मैंने नानी से पूछा- मामा कहाँ हैं?
तो वो कहने लगी- वो कहीं शराब पीकर पड़ा होगा!

और वो सुबकने लगीं तो मैंने उनको मनाने के लिए सिर पर हाथ रखा तो वो और जोर से रोने लगीं। वो किसी भी तरह से चुप नहीं हो रही थी। इतने में मामी वहाँ पर आ गईं तो मैं उठा और टीवी चला दिया और उस पर भजन-कीर्तन लगा दिया।

फिर मैंने नानी से कहा- इसे देखो!
तो कई बार कहने पर वो उसे देखने लगीं।
मैंने नानी से कहा- मैं मामी से जाकर बात करता हूँ, तुम टीवी देखो!

और मैं मामी को लेकर दूसरे कमरे में आ गया।

अब तक मामी भी सुबकने लगी थीं, मैं जैसे ही दूसरे कमरे में आया तो मामी मेरे से जोर से लिपट गईं और सुबकने लगीं। मैं मामी को चुप कराने की कोशिश करने लगा और उनके चूतड़ों को साड़ी के ऊपर से ही दबाने लगा। मैं पहले धीरे-धीरे फिर जोर जोर से मामी के चूतड़ों को साड़ी के ऊपर से रगड़ रहा था।

मुझे यह जानकर थोड़ा आश्‍चर्य हुआ कि मामी ने पैंटी नहीं पहनी थी। मुझे लगता है कि मामी ने मुझे देखकर अपनी पैंटी उतार दी होगी ताकि चुदवाने में परेशानी न हो।

मैंने मामी की साड़ी को ऊपर उठाया और उनके नंगे चूतड़ों को दबाने और रगड़ने लगा। उफ़्फ़! गाण्ड कितनी चिकनी और मस्‍त चूतड़ थे मामी के। जहाँ पर भी हाथ रखता वहाँ से हाथ फिसल जाता!
मैं अपनी एक ऊँगली उनकी चूत के पास ले गया और दोनों होंठों के बीच डालकर सहलाने लगा। सहलाते-सहलाते मैं अपनी ऊँगली उनकी चूत के दाने पर ले गया और जोर से रगड़ दिया। इससे मामी जोरों से चिहूंक उठी और मुझे और भी जोरों से जकड़ लिया।

अब मैंने मामी से कहा- अपना सिर ऊपर उठाओ!

जब मामी ने अपना सिर ऊपर उठाया तो मैंने अपने होंठ मामी के होंठों पर रखे और उनके होंठों को पहले धीरे धीरे चूमने लगा फिर तेजी के साथ चाटने लगा।

अब भला मामी कैसे पीछे रहती, उन्‍होंने भी मेरे होंठो को अपने होठों में भर लिया और चूसने लगी। फिर कुछ देर बाद मामी मुझसे अलग हुईं और मुझसे कहा- तुम ऊपर वाली मंजिल पर चलो, मैं भी अभी आती हूँ।

मैंने मामी की चूचियों को हल्‍के से सहलाया और ब्‍लाउज को ऊपर किया तथा दोनों चूचियों पर अपनी जीभ फिराई और बिना कुछ बोले ऊपर चला गया। मैं इंतजार कर रहा था कि मामी आयेंगी तो मैं उनको किस तरह से चोदूंगा।

करीब आधे घंटे बाद मामी आई और मुझसे लिपट गईं। मैं मामी को धीरे धीरे सहलाने लगा और उनकी साड़ी ऊपर कर दी और उनके नंगे चिकने चूतड़ों को हथेलियों में भर लिया और दबाने लगा। मामी के मुंह से वासनायुक्‍त हल्‍की-हल्‍की सिसकारियाँ निकल रही थी। मैंने मामी को पीठ के बल लिटा दिया और क‍हा- देखूँ मामी! तुम्‍हारे पेट में मेरा बच्‍चा आ गया है या नहीं!

और यह कहते हुए मैंने मामी की साड़ी को ऊपर खींच दिया।
मामी बोली- अभी बच्‍चा नहीं आया है।
मैंने पूछा- क्‍यों?

तो उन्‍होंने कहा- पिछली बार तुम चोद कर तो गये थे लेकिन जब तुमने चोदा था तो उसके दो दिन पहले ही माहवारी आई थी इसलिए पेट में बच्‍चा नहीं ठहरा है।

मैंने कहा- मामी कोई बात नहीं! मैं इस बार जब जाऊँगा तो तुम्‍हारे पेट में अपना बच्‍चा डालकर जाऊँगा। अब ठीक है अब खुश हो जाओ।

तो मामी मुस्‍कुरा पड़ी क्‍योंकि मैं जानता था कि मामा की इतनी क्षमता नहीं है कि वो मामी को बच्‍चा दे सकें।

अब मैंने मामी की टांगों को चौड़ा किया और उनकी दोनों टांगों के बीच में लेटकर अपना सिर मामी के नंगे पेट पर रख दिया और अपना एक हाथ नीचे ले जाकर उनकी चूत के होठों को सहलाने लगा। मामी धीरे धीरे तड़प रही थी और सिसकारियाँ भर रही थी।

जब मामी को सब्र नहीं हुआ तो उन्‍होंने खुद ही कहा- अब और न तड़पाओ और जल्‍दी से चूत चाटो।

मैंने अपना सिर उठाया और मामी की चूत के पास ले गया और मामी की बुर के मोटे होंठों को चाटने लगा। अब तो मामी की बुर के होंठ पहले से भी ज्‍यादा मोटे लग रहे थे शायद मेरे चोदने के कारण होठों पर रगड़ लगी और वे और भी ज्‍यादा मोटे हो गये। अब मैं मामी की चूत के होठों को मुँह में भर भर कर चूसने लगा।

मामी को सब्र नहीं हो रहा था और वे मेरा सिर पकड़कर अपनी चूत पर दबा रही थी। शायद मामी चाहती थीं कि मैं उनके दाने को कसकर चाटूं लेकिन मैं ऐसा कर नहीं रहा था तो उन्‍होंने मेरा सिर पीछे किया और अपनी ऊँगलियों से अपनी चूत को खोला और कहा- यहाँ पर चाटो।

मैं मुस्‍कुराकर वहाँ पर चाटने लगा और अब मैं पूरी दक्षता से चाट रहा था। मामी बुरी तरह से बिस्‍तर पर हिल रही थीं और मेरे सिर को पकड़कर दबा रही थीं।

मैंने मामी की चूत के दाने को अपने होठों में दबाया और जीभ से जोर से रगड़ दिया। मामी ने एक दबी हुई जोर से चीख मारी और शांत हो गईं। मामी झड़ चुकी थी। अब मामी ने मेरे सिर को ऊपर उठाया तो मेरा मुंह उनके चूत-रस से सना हुआ था। मामी ने मुझको अपने ऊपर खींचा और मेरे मुँह को चाटने लगी।

जब वो सब कुछ चाट चुकीं तो मैंने मामी की साड़ी और पेटीकोट को निकाल दिया और उनके पेट पर बैठ गया। मैं मामी की एक चूची को हाथ से पकड़कर धीरे धीरे सहलाने लगा और धीरे से एक नीचे वाला बटन खोल दिया। अब मैं मामी की चूची को दोनों हाथों से ब्‍लाउज के ऊपर से ही सहलाने लगा और साथ ही धीरे धीरे एक एक करके बटन भी खोलता जा रहा था।

फिर जब मैंने सारे बटन खोल दिये तो मामी ने खुद ही अपना ब्‍लाउज उतार दिया। मैंने मामी की खूबसूरत गोरी गोरी चूचियों को हाथों मे भर लिया और अपने होठों को चुचूक पर लगा कर चूसने लगा। उनमें अभी दूध तो नहीं आ रहा था किन्‍तु मैं जानता था कि जल्‍दी ही मेरा बच्‍चा पैदा होगा तो आने लगेगा ही लगेगा।

मामी स्‍नेह से मेरे बालों में हाथ फिर रही थी और ऐसे अपने दूधों को दबा दबा कर पिला रही थीं जैसे कि मैं उनका बच्‍चा हूँ। अब मामी ने मुझे उठाया और पीठ के बल लिटा दिया। इतनी देर तक मजे के दौरान कब मेरे कपड़े मामी ने निकाल दिये मुझे पता ही नहीं चला।

अब मामी मेरे लंड को अपनी गोरी गोरी नेलपालिश से सजी ऊँगलियों से सहला रही थीं। लगता था कि उनका लंड चूसने का इरादा था और हुआ भी यही। मामी ने धीरे से अपने लिपिस्टिक रचे होंठों को लंड के पास लाईं और उसका टोपा अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगीं।

किन्‍तु इस समय मेरा इरादा लंड चुसाने का नहीं हो रहा था क्‍योंकि मैं इतना उत्‍तेजित हो चुका था अब खुद के संभाले नहीं संभल पा रहा था। कोई एक मिनट बाद ही मैंने मामी का सिर उठाया और उनको पकड़कर अपने ऊपर खींच लिया। मेरे इस तरह खींचने से मामी को ऐसा लगा मानो मामी प्‍यासी रह गईं हों।

मैंने मामी से कहा- लंड फिर बाद में चूस लेना, अभी मैं तुम्‍हें चोदना चाहता हूँ।

मामी मान गईं और मुस्‍कुरा पड़ीं। अब मामी ने मेरा लंड पकड़ा और अपनी चूत का निशाना बनाया और उस पर बैठती चली गईं। आह कितना शानदार अहसास था वह! इतना मजा आया कि इसे शब्‍दों में बयान नहीं किया जा सकता। मानो मैं जन्‍नत में पहुंच गया होऊँ।

उधर मामी की हालत भी मुझसे जुदा नहीं थी। वो तो आँखें बंद किये अपने होंठों को खोले मानो स्‍वर्ग में तैर रही हों। मैंने मामी को अपने ऊपर लिटा लिया और उनके होंठों को अपने मुँह में भरकर चूसने लगा। मामी धीरे धीरे ऊपर से झटके लगा रही थीं तो मैं भी कहाँ पीछे रहने वाला था। मैं भी मामी को बाहों में भरकर पहले धीरे-धीरे फिर तेज-तेज जोरदार झटके लगाने लगा।

मैं अपने हाथों को मामी के चूतड़ों पर ले गया। वाह! कितने अच्‍छे और मजा देने वाले थे मामी के चूतड़! हर एक झटके में जब वो ऊपर को उठतीं तो उनके चूतड़ भी ऊपर को उठते और मेरे हाथ पीछे हो जाते और जब वो मेरे लंड पर बैठती तो मेरे हाथ उनके चूतडों पर कस जाते।

वाह क्‍या मजा आ रहा था।

काश मामी की शादी मुझसे हुई होती!
लेकिन अब भला ऐसा कहाँ सम्‍भव था।

कुछ समय बाद मैंने मामी को ऊपर उठाया और दूसरी तरफ मुँह करके बैठने को कहा। मामी मेरे लंड पर बैठे ही बैठे दूसरी तरफ घूम गईं। मैंने मामी के दूध पकड़े और दबा दबा कर मामी को चोदने लगा। इससे मामी को काफी मजा आया। अब मामी की सिसकारियाँ तेज हो गई थीं, लग रहा था कि वो झड़ने वाली थी।

मैंने मामी को अपने ऊपर से उतारा और नीचे बिस्‍तर पर लिटा दिया और अपना लंड डालकर जोर जोर से चोदने लगा।

मैंने मामी से कहा- मेरा बच्‍चा पैदा करोगी?

तो उन्‍होंने कहा- मैं तुम्‍हारा ही बच्‍चा पैदा करने के लिए ही तो तुमसे चुदवा रही हूँ! वरना क्‍या कोई और नहीं है चोदने के लिए! मैं तुम्‍हारा ही बच्‍चा पैदा करूंगी।

अब मैं मामी को जोर-जोर से चोद रहा था और मामी की सिसकियाँ निकल रही थीं। मामी ने एक जोर से हिचकी ली और झड़ने लगी।

मुझे लगा कि अब मेरा भी निकलने वाला है तो मैंने मामी को आगाह किया कि मेरा निकलने वाला है, और पूरी ताकत से मामी के दूधों को पकड़ा और जोर से धक्‍का मारा। मेरा वीर्य निकल रहा था और मैं उनके दूधों को पकड़े जोर-जोर से धक्‍के मारता ही जा रहा था। दस बारह धक्‍कों में जब मेरा वीर्य पूरा निकल गया तो मैं मामी के ऊपर ही लेट गया और मामी ने मुझको जोरों से जकड़ लिया। अब मैं इस चुदाई लीला को ज्‍यादा क्‍या लिखूं?

हमेशा से ऐसा होता आया है और सभी लोग जानते हैं कि चुदाई कैसे की जाती है।

संक्षेप में इतना जान लीजिए कि हम दोनों ने ऐसी चुदाई की कि दोनों पूरी तरह से संतुष्ठि की कगार पर पहुँच गये।

मामी मेरे बालों में अपनी ऊँगलियाँ फिरा रही थी और मैं आराम से लंबी दूरी के घोड़े जैसी दौड़ लगाकर उनके ऊपर लेटा हुआ था। फिर मामी ने मुझसे अपने ऊपर से उठने को कहा तो मुझे होश आया और मैं उनके ऊपर से उठा।

मामी ने मुझसे कहा- काश! तुम मुझे पहले मिले होते तो मैं तुम्‍हीं से शादी करती।

मैंने मामी से कहा- चाहता तो मैं भी हूं कि तुम्‍हारे साथ रहूँ, किन्‍तु अब भला कैसे हो सकता है। अब ऐसे ही जैसे चल रहा है वैसे ही ठीक समझो।

मामी ने मुझे चूमा और अपने कपड़े पहनते हुए कहने लगी- अब काफी देर हो गई है अब नीचे चला जाए।

मैंने घड़ी देखी तो डेढ़ घंटे से भी ज्‍यादा हो गया था। मैंने मामी के पास जाकर उनकी जोर से पप्‍पी ली और कहा- अब तो तुम्‍हें बच्‍चा हो जायेगा!

तो उन्‍होंने कहा- हाँ! हो तो जायेगा, लेकिन तुम अभी घर न जाना और मुझे कुछ दिनों तक चोदो।

मैं मान गया और कई दिनों तक मामी को चोदता रहा।

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